रुई जैसे दिखने वाले बादल आखिर कितने भारी होते हैं? जानिए क्यों लाखों किलो वजन होने के बावजूद आसमान से नहीं गिरते
जब भी हम आसमान की ओर देखते हैं, तो सफेद और मुलायम बादल किसी रुई के फाहे जैसे दिखाई देते हैं। उन्हें देखकर शायद ही किसी के मन में यह ख्याल आता हो कि इनका वजन लाखों किलोग्राम हो सकता है। अधिकांश लोगों को लगता है कि बादल बेहद हल्के होते होंगे, इसलिए वे हवा में तैरते रहते हैं। लेकिन विज्ञान कुछ और ही कहानी बताता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, एक सामान्य आकार के बादल का वजन करीब 5 लाख किलोग्राम (500 टन) तक हो सकता है। यह वजन लगभग दो पूरी तरह लोडेड बोइंग 747 विमानों के बराबर माना जाता है। वहीं, गरज-चमक और तूफान वाले विशाल बादलों का वजन इससे कई गुना अधिक हो सकता है। इतना भारी होने के बावजूद बादल अचानक धरती पर क्यों नहीं गिरते? इसका जवाब बादलों के वजन में नहीं, बल्कि उनकी संरचना और हवा के अद्भुत विज्ञान में छिपा हुआ है।
आखिर बादल बनते कैसे हैं?
बादल कोई ठोस वस्तु नहीं होते। ये अरबों-खरबों बेहद छोटी पानी की बूंदों या बर्फ के सूक्ष्म कणों से मिलकर बनते हैं। जब पृथ्वी की सतह से पानी वाष्प बनकर ऊपर उठता है और ऊंचाई पर ठंडी हवा से मिलता है, तो वह संघनित होकर छोटी-छोटी बूंदों में बदल जाता है। यही बूंदें मिलकर बादलों का निर्माण करती हैं।
हालांकि देखने में बादल एक ठोस आकृति जैसे लगते हैं, लेकिन वास्तव में उनके अंदर मौजूद पानी की बूंदें पूरे बादल में बहुत बड़े क्षेत्र में फैली रहती हैं।
बादल का वजन कैसे मापा जाता है?
बहुत से लोगों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर वैज्ञानिक बादलों का वजन कैसे मापते हैं।
इसके लिए वैज्ञानिक लिक्विड वाटर कंटेंट (Liquid Water Content) नामक मापदंड का उपयोग करते हैं। इसका अर्थ है कि हवा के एक घन मीटर (1 Cubic Meter) हिस्से में औसतन कितना तरल पानी मौजूद है।
इसके बाद बादल के कुल आयतन (Volume) का अनुमान लगाया जाता है। यदि किसी बादल का आकार लगभग एक घन किलोमीटर है, तो उसमें मौजूद कुल पानी का वजन लगभग 5 लाख किलोग्राम तक पहुंच सकता है।
घने और काले वर्षा वाले बादलों में पानी की मात्रा कहीं अधिक होती है, इसलिए उनका वजन भी सामान्य बादलों की तुलना में कई गुना ज्यादा होता है।
फिर इतने भारी बादल नीचे क्यों नहीं गिरते?
यही सबसे रोचक सवाल है।
यदि किसी वस्तु का वजन लाखों किलोग्राम हो, तो वह जमीन पर गिरनी चाहिए। लेकिन बादलों के साथ ऐसा नहीं होता।
इसका कारण यह है कि बादल किसी एक बड़े पानी के गोले से नहीं बने होते, बल्कि इनमें मौजूद प्रत्येक पानी की बूंद का आकार बेहद छोटा होता है।
नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार, एक सामान्य बादल की बूंद का व्यास लगभग 10 माइक्रोन होता है। तुलना करें तो यह इंसान के बाल की मोटाई से भी कई गुना छोटा होता है।
इतनी सूक्ष्म बूंदों पर गुरुत्वाकर्षण बल का प्रभाव बहुत कम होता है।
टर्मिनल वेलोसिटी का कमाल
जब कोई वस्तु हवा में गिरती है, तो कुछ समय बाद वह एक निश्चित गति प्राप्त कर लेती है जिसे टर्मिनल वेलोसिटी (Terminal Velocity) कहा जाता है।
यह वह स्थिति होती है जहां गुरुत्वाकर्षण बल और हवा का प्रतिरोध एक-दूसरे को संतुलित कर देते हैं।
चूंकि बादलों की बूंदें अत्यंत छोटी होती हैं, इसलिए उनकी टर्मिनल वेलोसिटी एक सेंटीमीटर प्रति सेकंड से भी कम होती है।
इसका मतलब यह है कि वे इतनी धीरे-धीरे नीचे आती हैं कि हमें लगता है जैसे वे बिल्कुल स्थिर हैं।
गर्म हवा कैसे देती है बादलों को सहारा?
केवल बूंदों का छोटा आकार ही बादलों को नहीं संभालता।
पृथ्वी की सतह से लगातार ऊपर उठने वाली गर्म हवा (Warm Air) भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
जब सूर्य पृथ्वी को गर्म करता है, तो गर्म हवा हल्की होकर ऊपर उठने लगती है। इसी ऊपर उठती हवा को विज्ञान की भाषा में अपड्राफ्ट (Updraft) कहा जाता है।
यह अपड्राफ्ट एक धीमी लिफ्ट की तरह काम करता है और पानी की छोटी बूंदों को लगातार ऊपर की ओर धकेलता रहता है।
गुरुत्वाकर्षण उन्हें नीचे खींचता है, लेकिन ऊपर उठती हवा उन्हें फिर ऊपर पहुंचा देती है। इसी संतुलन के कारण बादल कई घंटों तक आसमान में तैरते रहते हैं।
तूफानी बादलों में क्यों बढ़ जाती है ताकत?
सामान्य दिनों में ऊपर उठती हवा की गति बहुत कम होती है।
लेकिन जब आंधी या तूफान बनने लगता है, तब यही हवा कई मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से ऊपर उठती है।
यही कारण है कि तूफानी बादलों में बहुत अधिक मात्रा में पानी जमा हो जाता है और वे आकार में भी विशाल बन जाते हैं।
इसी प्रक्रिया के कारण गरज-चमक वाले बादल कई किलोमीटर ऊंचाई तक विकसित हो सकते हैं।
नमी वाली हवा हल्की क्यों होती है?
यह सुनकर कई लोगों को आश्चर्य हो सकता है कि गीली हवा, सूखी हवा से हल्की होती है।
दरअसल, सूखी हवा में मुख्य रूप से नाइट्रोजन और ऑक्सीजन गैस होती हैं।
जब हवा में जलवाष्प (Water Vapour) की मात्रा बढ़ती है, तो ये भारी गैसें आंशिक रूप से हल्के जलवाष्प से बदल जाती हैं।
परिणामस्वरूप पूरी हवा का घनत्व कम हो जाता है और वह हल्की बन जाती है।
यही हल्की और नम हवा बादलों को लंबे समय तक ऊपर बनाए रखने में मदद करती है।
बादल आखिर बारिश कब बनते हैं?
बादल हमेशा आसमान में नहीं रहते।
समय के साथ बादलों के भीतर मौजूद छोटी-छोटी बूंदें आपस में टकराती रहती हैं।
धीरे-धीरे ये बूंदें एक-दूसरे से जुड़कर बड़ी होती जाती हैं।
जब उनका आकार लगभग एक मिलीमीटर तक पहुंच जाता है, तब उनका वजन लाखों गुना बढ़ जाता है।
अब उनकी टर्मिनल वेलोसिटी भी काफी बढ़ जाती है।
ऐसी स्थिति में ऊपर उठती हवा इन भारी बूंदों को संभाल नहीं पाती और वे वर्षा के रूप में धरती पर गिरने लगती हैं।
यही कारण है कि शांत दिखने वाला बादल अचानक तेज बारिश शुरू कर देता है।
क्या सभी बादलों का वजन समान होता है?
नहीं।
बादलों का वजन उनके प्रकार, आकार और उनमें मौजूद पानी की मात्रा पर निर्भर करता है।
हल्के सफेद क्यूम्यलस बादल अपेक्षाकृत कम भारी होते हैं।
वर्षा वाले घने निम्बस बादलों का वजन कई लाख से लेकर करोड़ों किलोग्राम तक हो सकता है।
गरज-चमक वाले क्यूम्यलोनिम्बस बादल सबसे भारी बादलों में गिने जाते हैं।
बादलों का अध्ययन क्यों महत्वपूर्ण है?
वैज्ञानिक लगातार बादलों का अध्ययन करते रहते हैं क्योंकि—
मौसम का पूर्वानुमान लगाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
वर्षा, आंधी और तूफानों की भविष्यवाणी इन्हीं के आधार पर की जाती है।
जलवायु परिवर्तन को समझने में भी बादलों का बड़ा योगदान है।
कृषि, विमानन और आपदा प्रबंधन के लिए भी बादलों का अध्ययन अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
आसमान में तैरते बादल भले ही हल्के और मुलायम दिखाई देते हों, लेकिन उनका वास्तविक वजन लाखों किलोग्राम तक हो सकता है। इसके बावजूद वे धरती पर इसलिए नहीं गिरते क्योंकि उनमें मौजूद पानी की बूंदें अत्यंत सूक्ष्म होती हैं, उनकी गिरने की गति बेहद कम होती है और पृथ्वी से ऊपर उठने वाली गर्म हवा उन्हें लगातार सहारा देती रहती है। जब यही बूंदें आपस में मिलकर बड़ी हो जाती हैं, तब उनका वजन बढ़ जाता है और वे बारिश की बूंदों के रूप में धरती पर गिरने लगती हैं। बादलों का यह अद्भुत विज्ञान न केवल मौसम को समझने में मदद करता है, बल्कि यह भी बताता है कि प्रकृति कितनी जटिल और आश्चर्यजनक है।

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